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सच्ची ख़ुशी 

sachi khushi

सच्ची ख़ुशी

मैंने माँगा मालिक से :
“खरीद पाऊँ  खुशियाँ,
उदास चेहरों के लिए…
मेरे  किरदार का मोल
इतना करदे मेरे मौला !!”
मालिक का  जवाब था :
खुशियों की तिजारत की
इज़ाज़त नहीं मेरे जहाँ में
कीमत कितनी है लगाओगे कैसे
लगाई  भी तो चुकाओगे कहाँ से ?
बस याद करलो वो सारे किरदार
जिन्होंने खुशियाँ बिखेरी तुम्हारी खातिर
खुशियाँ बाँटने की काबलियत
तुम में भी हो जायेगी हाज़िर |
खुशियों का बस “देन देन” ही चलता यहाँ पे
खुशियों को लेने की ज़रुरत नहीं पड़ती
वो खुद ब खुद उमड़ती हैं तुम्हारे दिलो-जिगर में
खुशियों में लेन-देन की करना न हिमाकत
खुशी देना ही,
सही मायने में है मेरी सच्ची इबादत!

-रविन्द्र कुमार करनानी 
rkkblog1951.wordpress.com 

1 thought on “सच्ची ख़ुशी ”

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