Life, My Poems, My Text

मुस्कुराहट में आँसू

एक सह ब्लॉगर @Rekha Sahay जी ने अपने ब्लॉग पर लिखा 
“दिलों- दिमाग़ को दर्द जमा करने का कचरादान ना बनाओ. खुल कर जीने के लिए दर्द को बहने देना ज़रूरी है -बातों में, लेखन में ….. खुल कर हँसने के लिए खुल कर रोना भी ज़रूरी है, ताकि दिल और आत्मा का दर्द आँसुओं में बह जाए.  “
मैं उनकी बातों से सौ प्रतिशत इत्तेफ़ाक़ रखता हूँ | उन्होंने लिखा भी बहुत बेहतरीन है : “दर्द जमा करने का कचरादान ना बनाओ”  सच है कि आंसू बहने से दिल हल्का होता है , पीड़ा कम तकलीफ देती है ! ‘घाँव भरने में मदद मिलती है | पर मेरा यह भी मानना है की आँसू केवल अपनो के वियोग में ही ना बहें , उनके संग बीते हर मीठे  हँसते अनुभव भी  आँखों में आँसू ले आयें पर लबों पर मुस्कान के साथ !  अभी हाल ही में अपने एक नजदीकी को भी खोया है मैंने, उसकी याद जब आती है उसका मुस्कुराता चेहरा सामने आ जाता है और मेरे चेहरे पर भी एक मुस्कान सी आ जाती है |   रेखा जी के   पोस्ट के पश्चात,  और ये बातें मन में थी हीं ,अनायास ही कुछ लाइनें लिखी गयी हैं  यही बात कहने के उद्देश्य से |

muskurahat mein aansoo

 

मुस्कराहट में आँसू

अपनों के जाने की पीड़ा बढ़ती  है मानों हर प्रहर
उनकी यादें ले आती हैं गिरती उठती दर्द की लहर
उनकी स्मृति से आँसू आ जायें  तो क्या बात होती
आँसुओं में व्यथा यह बह पाये तो क्या बात होती
पर दिल का क्या करूँ तैयार नहीं आँखों में आँसू लाने
अपनों की कमी अखरा कर कर नयन मेरे ढलकाने
दिल ने जिन्दा रख रखी हैं उनकी खुशनुमा यादें बातें
और जब तब
ले आता है भरे नयनों में, लबों पे हल्की मुस्कानें |

-रविन्द्र कुमार करनानी

rkkblog1951.wordpress.com

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2 thoughts on “मुस्कुराहट में आँसू”

  1. बेहद उम्दा और प्रेरक कविता है. आपने मेरी कविता के जवाब में बेहद बेहतरीन कविता लिख कर मेरा मान बढ़ा दिया . आपको बहुत बहुत धन्यवाद .

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