Life, My Poems, Self-development

ज़िन्दगी के इम्तिहान

Stumbled on to this old poem. Sharing it now! It is about moving from School exams to life’s exams!

Life ke imtehan

ज़िन्दगी के इम्तिहान

जबसे स्कूल कॉलेज के exam पूरे हुवे 
तबसे लाइफ के इम्तिहान  शुरू हो गये
आज अनायास ही एक नया अनुभव हुवा 
घर की लाईन मिलाते मिलाते 
अपने मोबाइल का नंबर डायल कर लिया 
आवाज़ आई :
*The Number You Have Called  Is Busy*  
“Please try again after sometime”
समझ आया की बडेरे कितना सही कहते हैं 

“दुनियां से मिलने में  सारी दुनिया मस्त है,
पर  खुद से मिलने की सारी लाइनें व्यस्त है….| “

अब भी वक़्त है, अपनी busy life में 
खुद के लिए भी समय निकाल  
‘अंदर’ जा!, अपनी असलियत पहचान 
औरोँ  से help की मत रख कोई आशा  
हाथ आयेगी केवल निराशा 
प्रायः लोग जानते स्वार्थ की ही भाषा 
 सिर्फ वाही वाही पाने के लिए 
औरों के लिए मत गवाँ समय फिजूल 

जिंदगी का बस एक ही है ऊसुल 
तुझे गिरना भी खुद है
और संभलना भी खुद है.  
17 Sep 2000 
-रविन्द्र कुमार करनानी 

2 thoughts on “ज़िन्दगी के इम्तिहान”

  1. सौ बात का एक बात—-

    जिंदगी का बस एक ही है ऊसुल 
    तुझे गिरना भी खुद है
    और संभलना भी खुद है.  

    बेहतरीन लेखन।👌👌

    Liked by 1 person

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